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Showing posts from May, 2022

शेरशाह के शासनकाल का क्या महत्व था

* शेर शाह सूरी का बचपन का नाम - फरिद खां था | * इसका जन्म 1472 ई. में बाजवाडा (होशियारपुर ) में हुआ था | इसके पिता हसन खा जो जौनपुर के छोटे जमीदार थे | * शेर खा को अपने माता व पिता से सच्चा स्नेह न मिल सका फरिद खा अपने पीता द्वारा सासाराम , खवास पुर के परगने को प्राप्त किया | जो उसके अधिकार में 1497 ई. से 1518 ई. तक रहा | * फरिद खा अपने अधिकारों के रक्षा व शक्ति के विस्तार के लिए विहार के शासक मोहम्मद शाह लोहानी के यहाँ नौकरी कर लिया | * एक बार लोहानी के साथ फरिद भी सिकार खेलने गया था शेर को एक ही तरवार से दिर काट दिया तो लोहानी ने उसके बहादुरी पर प्रसन्न होकर  शेर खां की उपाधि दी | * 1529 ई. को बंगाल के शासक नुसरक्त  शाह को पराजीत कर हजरत-ए-आला की उपाध धारण की | * 1530 ई. को शेर खा ने चुनार के किले दार की विधवा पत्नी लाड मलिका से विवाह कर लेने के बाद उसे चुनार की बहोत संपत्ति मिल गया | * चौसा का युद्ध एवं 1540 ई में विलग्राम का युद्ध जीतने के बाद शेर खा उसी समय दिल्ली के गाद्दी पर बौठा | * वहा पाटिल पुत्र का नाम पटना रख कर अपने साम्राज्य की राजधानी बनायीं | * शेर खां ने भू...

हुमायूँ का इतिहास

 * हुमायूं का पूरा नाम नासुरुद्दीन मुहम्मद हुमायूं था । *हुमायूं का जन्म बाबर की पत्नी माहम अनगा के गर्भ से 6 मार्च, 1508ई.को काबुल में हुआ था। * बाबर के चार पुत्र थे जो निंमलिखित है 1) हुमायूं 2) कामरान 3) असकरी 4) हिंदाल  * बाबर ने अपना उत्तरा अधिकारी हुमायूं को बनाया । * हुमायूं का राज्याभिषेक 29 दिसंबर , 1530 ई. को आगरा में 23 वर्ष की आयु में किया गया । * बाबर द्वारा हुमायूं को दिया गया निर्देश की वह अपने छोटे भाईयो के साथ उदारता का व्यवहार रखे । * हुमायूं ने काबुल, कंधार , एवम पंजाब की सूबेदारी का जिम्मा कामरान को दिया । * अस्करी को संभल का सूबेदारी । * हिंडाल को  अलवर की सूबेदारी दिया । * साम्राज्य का विभाजन हुमायूं की सबसे बड़ी भूल थी । वास्तव मे अविवेक पूर्व ढंग से किया गया साम्राज्य का विभाजन कालांतर में हुमायूं के लिए घातक सिद्ध होता है। * 1533ई. में हुमायू ने दिन पनाह नामक महल का निर्माण कराया और उसी में शेर-ए-मण्डल के नाम से एक पुस्तकालय खुलवाया । * चौसा का युद्ध :- 25 जून, 1539ई.  * शेर खा व हुमायूं के बीच चौसा का युद्ध हुआ इस युद्ध में शेर खा विजय ह...

मुग़ल शासकों की सूची

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मुग़ल वंश का संस्थापक - बाबर है | *1526 ई. में पानी पथ प्रथम युद्ध में दिल्ली संत्लत के अंतिम वंश लोदी वंश के इब्राहिम लोदी को पराजित कर मुग़ल वंश की स्थापना किया | * मुग़ल वंश का प्रथम शासक - जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर (1526 ई. से 1530 ई. तक ) *14 फवरी ,1483 ई. फरगाना (अफगानिस्तान ) में जहीरुद्दीन मुहम्मद बाबर का जन्म हूआ | * बाबर अपने पिता की तरफ से पाचवां वंशज व माता की तरफ से चौदहवाँ वंशज था | * पिता का नाम - उमरशेख मिर्जा तथा माता का नाम - कुतुल निगार खानम थी | * बाबर तुर्की वंश का चंगाताई वंश के अंतर गत आता था | * बाबर अपने पीता उमरशेख मिर्जा की मृत्यु के बाद 11  वर्ष की आयु में 1494 ई. में एक छोटी सी रियासत फरगना का  शासक बना | * बाबर ने अपना राज्भिशेख अपने  दादी एसाद दौलत बेगम के सहयोग से करवाया था | * बाबर ने फरागाने के शासन काल में 1501 ई. में अमर कंध पर शासन कर लिया जो मात्र आठ माह उसके कब्जे में रहा था  * 1504 ई. में बाबर ने कबूल पर अधिकार कर लिया , 1507 ई. मे अपने पूर्वजो द्वारा धारण की गयी उपाधि को त्याग कर एक नयी उपाधि को धरान किया | बाबर की भारत पर विजय...

लोदी वंश (1451 ई. से 1489 ई.तक )

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बहलोल लोदी : 1451 ई. से 1489 ई. तक ( लोदी वंश का पहला शासक ) * बहलोल लोदी दिल्ली में प्रथम अफगान राज का संस्थापक था , वह अफगानिस्तान में गिल्जाई कबीले के महत्वपूरण शाखा साहू में पैदा हुआ था | * 19 अप्रैल ,1451 ई. को बहलोल , बहलोल शाह गाजी की उपाधि से दिल्ली के सिंघासन पर बैठा क्युकी वह लोदी कबिले का अग्रामी था इसके द्वारा स्थापित वंश - लिदी वंश  * बहलोल की महत्त्व पूरण सफलता जौनपुर राज को दिल्ली में मिलाना था | सिकंदर लोदी 1489 ई. से 1517 ई. तक ( दूसरा शासक ) *बहलोल लोदी का उत्तराधिकारी उसका पुत्र निजाम खा 17 जुलाई , 1489 ई. को सुलतान सिकंदर की उपाधि से दिल्ली के गद्दी पर बैठा | * सिकंदर लोदी सिंघाशन पर बैठते ही अपने विरोधीयो में अपने चाचा आलम खां , आजम हुमायूं को पराजीत किया | * सिकंदर लोदी 1514 ई. को आगरा शहर कि स्थापना करवाया आगे चल कर आगरा को अपनी राजधानी बनवाया | * भूमि को मापने के लिए एक पैमाना भी जारी किया था जिसका नाम - गजे सिकंदरी  जिसकी लम्बाई 3 cm थी | * गले की बीमारी के कारन इसकी मृत्यु  21 नवम्बर , 1517 ई. को हो गयी | इब्राहिम लोदी 1517 ई. से 1526 ई. ...

सैयद वंश 1414 ई.से 1451 ई.

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 सैयद वंश 1414 ई.से 1451 ई. तक शासन किए  * खिज्र खा ने दौलत खा को पराजीत कर दिल्ली के राजगद्दी पर अधिकार कर लिया , उसने सुल्तान की उपाधि न धारण करके रैयत ए आला की उपाधि धारण की। *तैमूर लंग जिस समय भारत से वापस जा रहा था । उसने खिज्र खां को लाहौर एवम दीवाल पूर का शासक नियुक्त किया तैमूर लंग खिज्र खां का सेना पति था । खिज्र खां नियमित रूप से तैमूर लंग के पुत्र शाहरुख को कर भेजा करता था। * इतिहास कार फरिस्ता के अनुसार खिज्र खां न्यायप्रिय एवं उदार शासक था। 20 मई 1421 ई. को खिज्र खां की मृत्यु हो गई। शासक:-  2 मुबारक शाह :-  (1421ई. से 1434ई.तक) * खिज्र खां अपने पुत्र मुबारक शाह को अपना उत्तरा धिकारी बनाया उसने शाह की उपाधि धारण कर अपने नाम के सिक्के को जारी किया । * मुबारक शाह अपने पिता की तरह विद्रोह का दमन कर और राजस्व कर के लिए सैनिक यात्राएं करनी पड़ी । * यहिया बिन अहमद को मुबारक शाह का संरक्षण प्राप्त था । इसने तारीख-ए-मबारक पुस्तक की रचना की जिसमे सैयद वंश की जानकारी प्राप्त होती या मिलती है। मुबारक शाह यमुना नदी के किनारे मुबारकबाद नामक नगर बसाया। * मुबारक शाह ...

दिल्ली संतलत part 3

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फिरोज शाह तुगलक के उत्तराधिकारी  1. तुगलक शाह:- (1388से 1389ई. तक) * फिरोजशाह तुआगलक के बाद उसके पुत्र फतह खा का पुत्र तुगलक शाह गयाशुद्धिन द्वतिय की उपाधि धारण करके 1388 ई. में दिल्ली के सिंघासन पर बैठा  * तुगलक शाह विलासी प्रवित्ती के कारण असंतुष्ट सरदारो ने उसकी हत्या कर दी। 2. अबुबक :- (1389से1390 ई.तक ) * फिरोज तुगलक का पौत्र जफर खा के पुत्र अबूबक को फरवरी 1389ई. को दिल्ली का सुलतान बनाया गया था। 3. नसुरुद्दीन मोहम्मद :- (1390 से 1394 ई. तक)  * नसीरुद्दीन अधिक शराब पीने के कारण जनवरी 1394 ई. को उसकी मृत्यु हो गई । उसके मरने के बाद उसका पुत्र हुमायु को अलाउद्दीन सिकन्दर शाह की उपाधि पर दिल्ली की गद्दी पर बैठा परंतु 6 सप्ताह के बाद बाद उसकी मृत्यु हो गई । *उसके बाद अमीरों ने उसके अनुज नसरुद्दीन महमूद को गद्दी पर बैठते हैं । यह तुगलक वंश का अंतिम शासक था। * नसरुद्दीन के शासन काल में दिल्ली संतलत से दक्षिण भारत , बंगाल , खान देश , गुजरात , मालवा स्वतंत्र हो गए । * नसीरुद्दीन महमूद के समय मलिक सरवर हिजड़े ने सुल्तान से मलिक कुशर्सक पूर्वाधिपति की उपाधि धारण कर जौनपुर एक स...

फिरोज शाह तुगलक 1351ई. से 1388 ई.

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 फिरोज शाह तुगलक मोहम्मद शाह का चचेरा भाई था एवम सिपाही सलार रज्जब का पुत्र था।  *मोहम्मद बिन तुगलक की मृत्यु के बाद 20 मार्च 1351ई. को फिरोज शाह तुगलक का राजभिषेख हुआ । पुनः फिरोज का राजभिशेख दिल्ली में अगस्त 1351ई . को हुआ । *सुलतान बनाने के बाद फिरोजशाह तुगलक ने सभी कर्ज को माफ कर दिया।  * फिरोज शाह तुगलक ने सरकारी पदों को वंशानुगत कर दिया  *राजस्व व्यवस्था के अंतर्गत फिरोज शाह तुगलक ने अपने साधन काल में 24 कस्ट दायक करो को समाप्त। कर दिया केवल चार कर वशुलने का आदेश दिया  1. खराज कर  2. खूम्स कर 3. जकात कर  4. जजिया कर Note:- फिरोज शाह तुगलक ब्राम्हणों पर जजिया कर वशुलाने वाला पहला साशक था । * फिरोज शाह तुगलक ने एक नया कर लागू किया सिंचाई कर जो पैदावार का 1/10 भाग वसूलता था । *फिरोजशाह तुगलक ने पाँच नहरों का निर्माण कराया था । *फिरोजशाह तुगलक ने सामाजिक कार्यों के अंतर्गत 300 नए नगर की स्थापना किया , इसमें से हिसार (हरियाणा ), फिरोजा बाद (दिल्ली), फतिहा बाद , जौनपुर आदि शहर थे । Note:- जौनपुर का पुराना नाम जमदगनी पुरम था  *फिरोजशाह तुगलक अ...

तुगलक वंश

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 मुहम्मद बिन तुगलक (1325ई. -1351ई. तक ):- * मुह्म्म्द बिन तुगलक  दिल्ली के सभी सुल्तानो में सर्वाधिक कुसाग्र बुद्धि संपन्न , धर्म निरपेक्ष ,व कला प्रेमी एवंम अनुभवी सेना पति था | *  मुह्म्म्द बिन तुगलक को धनवानों का राजकुमार भी कहा जाता है | *इसने के अभियान चलवाया था जो निम्नलिखित है - खुरासान अभियान :- चौथी योजना के अंतर गत  मुहम्मद बिन तुगलक खुरासान अभियान का उल्लेख किया खुरासन को जीतने के लिए  मुह्म्म्द बिन तुगलक ने 70 हजार विशाल सेना को तैयार करवाया और अपने सैनिको को एक वर्ष का अग्रिम वेतन भी दे दिया परन्तु राजनैतिक परिवर्तन के कारन दोनों देशो के बिच समझोता हो गया जिससे सुलतान की यह योजना असफल रही | जिससे  मुह्म्म्द बिन तुगलक को आर्थिक क्षति हुई | कराचिन का अभियान :- मुह्म्म्द बिन तुगलक कराचिन के अभियान के अंतर्गत खुसरो मलिक के नेतृत्व में एक विशाल सेना पहाड़ी राज्यो को जीतने के लिए भेजा परन्तु उसकी पूरी सेना जंगली राज्यों में भटक गयी इतहास कार इब्न बतूता के अनुसार केवल तीन अधिकारी बाख कर वापस आ सके  note :- अपनी महत्वा कांक्षी असफलताओ ,योजनाओ के ...

भारत पर अरबो का आक्रमण

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  मध्य कालीन भारत  भारत पर अरबो का आक्रमण :- मोहम्मद बिन कासिम के नेत्रित्व में अरबो ने भारत पर सफल आक्रमण किया (712 ई. ) जो सिंध प्रान्त पर किया था उस समय वहा का शासक दाहिन था | note :- भारत पर आक्रमण करने वाला पहला शासक मोहम्मद बिन काशिम था  भारत सबसे पहले ईरानियो ने आक्रमण किया   * भारत पर अरब वासीयो का मुख्य उद्देस्य धन दौलत को लूटना व इस्लाम धर्म का प्रचार प्रसार था  *  भारत पर सबसे पहले जजीय कर मोहम्मद बिन काशिम ने लागू किया जो गैर मुस्लिमो से लिया जाता था |