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*मध्य पाषाण काल *

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  भारतीय प्रागैतिहासिक से पहले दो कालो की जानकारी थी पूरा पाषाण काल व नव पाषाण काल और वहा से कुछ छोटे-छोटे उपकरण प्राप्त हुआ | जिन्हें शुक्ष्म औजार  कहा गया ,   क्योकि  इनकी  लम्बाई 1-8 सेमी के बिच थी | ये औजार त्रिभाजा , आयता , समलम्ब चतुर्भुज आकार के औजार की प्रमुखता थी | और इस काल में हड्डी के बने औजार भरी मात्रा में प्राप्त होने लगे | मानव खाद्य संग्राहक एवम आखेटक अवस्था से होता हुआ पशु पालन की अवस्था मिहो गया जो   निम्न्लोखित विशेषता है - ·          मह्दहा (प्रताप गढ़ ):- प्रताप गढ़ में स्थित महदहा से हमें हड्डियों के बने आभूषण , मृग श्रिंग के छल्लो की माला एवंम स्तम्भ गर्त    के प्रमाण मिलते है | ·          चौपानी मांडव (ईलाहाबाद ):- ईलाहाबाद के पास बेलम घाटी में स्थित एक महत्वपूर्ण स्थल जहा से जंगली चावल के प्रमाण मिले है यहाँ पर प्रागैतिहासिक काल के तीनो कालो के प्रमाण मीलते है | ·        ...

*प्राचीन इतिहास *

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इतिहास का परिभाषा :- अतीथ को जानते हुए , वर्तमान को पहचानते हुए , भविष्य को सवारना ही इतिहास है | ( S.K. panday ) इतिहास दो सब्दो से मिल कर बना है - इति +हास = इतिहास , इति का शाब्दिक अर्थ है पुराना और हास का शाब्दिक कहानी अर्थात पुराणी कहानी है , नोट :- इसे तीन भागो में बाटा गया है 1 )प्रागैतिहासिक काल 2) अध्येतिहासिक काल 3 )ऐतिहासिक काल   1 )प्रागैतिहासिक काल :- यह दो शब्दो से मिल कर बना है प्राक्+इतिहास इसका अर्थ है पहले की अवस्था इस काल में मानव को पढ़ने लिखने का ज्ञान नहीं था | इस काल का मानव मुख्यतः पत्थर के औजारों का प्रयोग करता था , अतः इस काल को पाषाण काल कहा गया है | भारतीय भारतीय प्रागैतिहासिक "काल   के जनक राबर्ट" क्रूस फिट है | जिन्होंने 1863 ई . में तमिल के पलवरम   में कुछ पाषाण उपकरण प्राप्त किया जिसमे ' हैण्ड एक्स ' प्रमुख इसी लिए दक्षिण भारत पूरापाषाण कालीन संस्कृत को ' हैण्ड एक्स ' संस्कृत कहते है | इसे तीन भागो में बाटा गया है |   a ) पूरापाषाण काल b) मध्य पाषाण काल c )नव पाषाण क...