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Showing posts from October, 2021

संविधान सभा का गठन(कैबिनेट मिशन )

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कैबिनेट मिशन के तहत कुल 389 सदस्य होने थे , जिसमे से 292 सदस्य भारतीय प्रान्त के थे | 4 सदस्य कमिशनरी के थे , 93 सदस्य देशी रियासत के थे | भारतीय संविधान के सदस्यों का चुनाव प्रान्तों के विधान सभा के सदस्यों द्वरा हुआ  अर्थात जनता के द्वारा हुआ 10 लाख के जनता पर चुनाव होन था ,और यह चुनाव अनापतिक प्रतिनिधित्व के  आधार  पर एकल संस्करणी  मत के द्वरा हुआ |भारत में संविधान सभा का गठन का अधार कबिनेट मिशन था | कैबिनेट मिशन के तहत संविधान सभा जुलाई ,1946 ई. में हुआ  लेकीन कैबिनेट मिशन द्वारा प्रस्तावित 389 सदस्य में से केवल 296 सदस्यो का चुनाव हुआ | जिसमे 208 कांग्रेस के थे ,73 मुस्लिम लीग , 15 निर्दली पार्टी के सदस्य थे | याद रहे इसमे 'शाम वादी पार्टी' के कोई भी सदस्य  भाग नहीं  लिया  मुस्लिम लीग पार्टी प्रारम्भ में भाग लेने का निर्णय लिया था , जब पहली संविधान सभा की बैठक हुई ,तो मुसलिम लीग सामिल नहीं हुई |  संविधान सभा की पहली बैठक 9 सितम्बर, 1946 ई. को दिल्ली के सेन्ट्रल हाल में हुई | इस दिन डॉ सचिद्दा नन्द सिन्हा को अस्थाई या प्रोटेम स्पीक...

*अंतरिम सरकार *

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1. जवाहर लाल नेहरू                   - कार्य परिषद के उपाध्यक्ष  ब्रिटिस माहाले को देखते थे  2. सरदार बल्लभ भाई पटेल         - गृह मंत्रालय  3. बलदेव सिंह                             - रक्षा मंत्री  4. सी . राज. गोपाला चारी            - शिक्षा मंत्री  5. जान माथाई                            - उद्द्योग एवं शिक्षा मंत्री  6. डॉ. C.H. भाभा                        - कार्य खनन एवं शक्ति  7. डॉ. राजेंद्र प्रसाद                       -खाद्य एवम कृषि मंत्रालय  8. आसफ अली                            - रेल मंत्री  9. जगजीव...

1947 ई. का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

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ब्रिटिस संसद ने 4 जुलाई 1947ई. को 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम' प्रस्तावित किया  गया , जो 18 जुलाई , 1947ई. को स्वीकृत किया गया | इस अधिनियम में 20 धाराये थी | इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान निम्न है - दो अधिराज्यो की स्थापना - : 15 अगस्त ,1947ई.  को भारत एवं पाकिस्तान नामक दो अधिराज्य बना गए और उनकी सत्ता ब्रिटिस सौप देगी |  सत्ता के उत्तदायीत्व  दोनों अधिराज्यो के समिधान सभा को सौप दिया जायेगा | भारत एवं पाक में एक-एक गवनर जनरल होंगे ,जिनकी नियुक्ति उनके मंत्री मंडल के सलाह से किया जायेगा | जब तक संविधान सभा  संविधान का  निर्माण नहीं कर लेती , तब तक वे विधान मंडल के रूप में कार्य करेंगे  भारत के मंत्री पद को समाप्त कर दिये जायेंगे | 1935 के भारतीय शासन अधिनियम द्वारा शासन जबतक संविधान सभा द्वारा नया संविधान  बनाकर तैयार नहीं किया जाता है ; तबतक उस समय 1935 के भारतीय शासन अधिनियम द्वारा शासन होगा |  इस अधिनियम के अधीन भारत भारत डोमेनियन को सिंध , बलूचिस्तान , प० बंगाल ,पूर्वी बंगाल , पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत और असम के सीलहट जिले को छोड़ कर ...

1935 का भारत शासन अधिनियम

  यह अधिनियम अभी तक पारित सभी अधिनियम में से सबसे बड़ा अधिनियम है | इसमें  321 अनुच्छेद  ,  10 अनुसूची  थी  वर्तमान में  75% संविधानिक  ढांचा इसी एक्ट पर आधारित है | इस एक्ट के पारित से भारत का शासन एकात्मक था  इसके द्वारा भारत में पहली बार संघात्म सरकार  की स्थापना हुई | भारतीय संघ का निर्माण ब्रिटीस  भारतीय प्रान्तों और देशी रियासतो से मिल कर होना था | प्रान्तों का विलय अनिवार्य था लेकिन देशी रियासतों का विलय एच्छिक था जो देशी रियासते भारतीय संघ में विलय होना चाहती थी उन्हें "  स्टूमेंट ऑफ़ एक्सेस  " पर हस्ताक्षर करना था ,लेकिन कुछ देशी रियासते के शासको इंकार कर देने से भारतीय संघ अस्तित्व में नहीं आ सका सैन्धान्तिक रूप से तो संघात्मक सरकार का प्रावधान हुआ , लेकिन व्यावहारिक रूप से यह अस्तित्व में नहीं आ सका | इसी लिए इसकी आलोचना करते हुए इसे "  निरंकुशता का एक्ट  " भी कहते  है  इसके द्वारा भारत में संघीय"  न्यायालय या फेडरल कोर्ट  " की स्थापना हुई लेकिन यह अंतिम अपीली न्यायालय नहीं था , क्यो...

1919 ई. का भारत शासन अधिनियम

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  भारतीयों को स्वशासन देने की दिशा  में या स्थाई संस्थाओं का विकास क्रमित या भारत उत्तेर्दायी सरकार की स्थापना करने या संसदी प्रणाली की करने के लिए ब्रिटिस ने यह अधिनियम  पारित किया क्योकि यह मांटेग्यू चेम्सफोर्ड के प्रयास से यह पारित हुआ , इसी लिए इसे मांटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार के नाम से जाना जाता है ,20 अगस्त 1917 ई . को इसके प्रस्तावना की घोषणा हुई इस एक्ट को अगस्त प्रस्तावना या अगस्त घोषणा पत्र के नाम से जाना जाता है | इसकी रिपोर्ट जुलाई 1918 ई . में प्रकाशित हुई यह एक्ट 1900 ई . में बना लेकिन यह क्रिया नविन 1921 ई . में किया गया इसकी निम्नलिखित विशेषता है - 1. केन्द्रीय विधान मंडल को द्विसदनात्मक बना        दीया गया-   ( a ) उच्च सदन को - राज्य परिषद् (कार्य काल   5 वर्ष , कुल सदस्य 60 ) ( b ) निम्न सदन - विधान सभा (कार्य काल 3 वर्ष , कुल सदस्य 146 ) 2 . प्रम्तिय विधान मंडल में कुछ सदस्य जनता के द्वारा चुन कर आने लगे , इस प्रकार प्रतक्ष्य निर्वाचन की नीव पड़ी | 3. इस अधिनियम ने भारत में ...

1909ई. का भारत शासन अधिनियम

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   इसे मार्ले   मीन्टो सुधार के नाम से जाना जाता है | 1. इस एक्ट का सबसे दुर्भाग्य पूर्ण पहलू यह था , की पहली बार मुसलमानों को धर्म के अधार   पर अलग प्रतिनिधित्व दिया गया | अर्थात सम्प्रदायीत्व   की सुरात हुआ इसका परिणाम भारत बिभाजन के रूप में देखने को मिला | 2. इस एक्ट की मुख्या विशेषता यह थी   की ,   वायसराय की कार्य करणी में गैर सरकारी सदस्यों की संख्या बढ़ा दिया गया तथा पहली बार वायसराय की कार्य करणी में भारतीय व्यक्ति की नियुक्ति हुई जिसका नाम एच. पी. सिन्हा था | 3. इस एक्ट के द्वारा वार्षिक बजट पर पूरा बहस करने के साथ - साथ पूरा प्रश्न पूछने का अधिकार मिला , परन्तु मतदान का अधिकार नहीं मिला | 4. इसी एक्ट में अप्रतक्ष्य शासन का नीव पड़ी |  

1892ई. भारत शासन अधिनियम

1885 में स्थापित राष्ट्रिय कांग्रेस तथा भारत के जनता का आन्दोलन के दबाव में आकर 1861 ई.  के सुधार करते हुए | इस एक्ट को पारित किया गया था | जी. एन. सिंह के अनुसार यह एक्ट कांग्रेस का पहला प्रयत्न था  इस एक्ट की निम्नलिखित बिशेषता है - 1. वायसरा की कार्य करणी में गैर सरकारी सदस्यों की बृद्धि किया गया | 2. वार्षिक बजट पर भारतीयों को बहस करने का अधिकार मिल गया , लेकिन उन्हें पूरा प्रश्न      पुछने का अधिकार नहीं मिला | 3. प्रान्तों के विधान मंडलों में कुछ सदस्य विश्वविद्यालयों द्वारा, कुछ जिला बोर्डो   , कुछ          व्यापर मंडलों द्वारा , एवंम नगरपालिका द्वारा मनोनीत हो कर आने लगे इस प्रकार            भारत में  अप्रतक्ष्य निर्वाचन की नीव पड़ी |

सम्राट के अधीन भारत का शासन

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भारत शासन अधिनियम 1858 से भारतीय संविधान भरत की ऐतिहासिक भूमि तैयार होती है | एसा इस लिए की इसके द्वारा 1858 का भारत का शासन   पहले भारत में इस्ट इंडिया कंपनी का शासन था | ईस्ट इंडिया कंपनी एक बैधानिक संस्था नहीं थी , इसके द्वारा कंपनी का शासन बंद कर दिया गया और भारतीय जनता पर अप्रतक्ष्य नियंत्रण पारित हो गया | क्योकि संसद द्वारा बनया गया कानून मान्य है | सं सद एक बैधानिक संस्था है इसकी निम्न विशेषता  है 1.          1773 ई . में स्थापित कोर्ट ऑफ़ डायरेक्टर 1784 ई . में स्थापित बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल को समाप्त कर दिया गया | उसके स्थान पर सिकरेटरी ऑफ़ द इण्डिया (सचिव ) की नियुक्ति किया गया है  2.    भारत सचिव की सहायता के लिए 15 सदस्यों का गठन करता है इन्डियन काउन्सिल या भारतीय परिषद का गठन किया गया | जिसमे 8 सदस्यों का गठन सम्राट तथा 7 सदस्यों का गठन की नियुक्ति ब्रिटेन में स्थित निदेशक बोर्ड करता है | भारत सचिव ब्रिटिस संसद का सदस्य था | और वही बैठता था , और जब कोई भारत के बारे पूछता तो उसका उत्तर वही पर भारत का सचिव उत्तर...

1853ई. का चार्टर एक्ट

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 यह कंपनी पर नियंत्रण करने का ब्रिटिस संसद का     अंतिम अधिनियम था |    इसके द्वारा ब्रिटिस कंपनी भारत में रहने की समय सीमा को समाप्त कर दिया , कहा गया की    भारत में कंपनी तभी तक रहेगी जब तक ब्रिटिस संसद चाहेगी | इस एक्ट के द्वारा पुरे भारत के लिए केन्द्रीय  विधान मंडल का गठन किया गया तथा   गवनर जनरल को केन्द्रीय पालिका     के लिए कानूनी तौर पर नियुक्त किया गया | और भरता में सिविल सेवा परीक्षा का   आयोजन किया गया | लार्ड मैकाले के सुझाये गए नियमो के अनुसार 1854ई.  में    सिविल सेवा      का स्थावाना किया गया | जबकि पहली परीक्षा 1922 ई. को होआ  

1833ई. का चार्टर एक्ट

 1833ई. का चार्टर एक्ट    इस एक्ट  के  द्वरा  कंपनी के ब्यापारिक एवं राजनैतिक अधिकार  को  पुर्णतः  समाप्त   कर दिया गया  और सभी ब्रिटेन निवासी को भरता में ब्यापार करने की  पूर्णतः  छुट  दिया  गया  | अब भरत में बंगाल के गवनर जनरल के पद को समाप्त कर दिया गया  पुरे भारत   के लिये गवर्नर जनरल बनाया गया | बंगाल का अंतिम गवर्नर  जनरल  तथा   भारत  गवनर  जनरल लार्ड विलीयम  बैंटिंग  को   बनाया  जाता  है  |   गवनर की  सहायता   के  लिये  चोथे  सदस्य कीनियुक्ति की जाती है जिसका नाम लार्ड मैकाले था | जिसने भरत के लिए विधि आयोग का विधि सख्या  बनाया इस  एक्ट के 1843ई.   अंतर-गत  दास प्रथा   का   उन्नमूलन  केर  दिया  गया  (लार्ड सरमबरो) था  | और कंपनी को 20 वर्ष तक ब्यापार करने का मौका दिया गया |  { अगले भाग में :- 1853ई. का...

1813ई. का चार्टर एक्ट

  1813ई. का चार्टर एक्ट  इस  एक्ट  के द्वारा चाय और चीनी के मामले को छोड़ कर कंपनी का एक अधिकार समाप्त  कर दिया  |  सभी  ब्रिटेन  निवासी   को   लैसेंस   देकर ब्यापार   करने  का  छुट दिया  जाता है  ,जिसका अन्तोम परिणाम यह होता है | की भारतीय बाजार  विदेसी  वस्तुए  से पट गया और भारत का अर्थ   व्यवस्थ  और  कृषि व्यवथा   चौपट  हो  गया  और  प्राथमिक शिक्षा के  लिया एक लाख  रूपय  प्रति  वर्ष  खर्च   करने   का निर्णय लिया गया और भारतीयों ने और 20 वर्ष कंपनी व्यापर करने का मौका  दिया गया |  {अगले भाग में :- 1833 ई . का चार्टर एक्ट :- }                                                                  ...

1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट :-

1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट :- यह कंपनी पर नियंत्रण करने वाला   ब्रिटिस   संसद   का पहला अधिनियम था | इसके द्वारा भारत में सुनिश्चित शासन   की   नीव   पड़ीं बंगाल   के लिए एक गवर्नर जनरल की नियुक्ति किया गया | जिसका नाम    वारेन   हेस्टिंग था |  इसकी सहायता के लिए तीन कार्य करणी का गठन किया गया | सरे  निर्णय बहुमत   से  लिए   जाते थे |  मद्रास और बम्बई के प्रेसीडेंसी को बंगाल के अधीन कर   दिया गया | गवर्नर जनरल   एक-एक गवर्नर की माध्यम (सहायता) से वहा पर  शासन करता था | इस एक्ट के द्वारा   बोर्ड ऑफ़ कंट्रोल   का  गहन किया   गया  जो कम्पनि का देख भाल कराती थीं | इस अधिमियम के तहत  1774 ई .   में   एक  सुप्रीम  कोर्ट किम स्थापना हुई ; लेकिन यह भारत का अंतिम अपीली न्यायालय  नहीं  था  |  इसके अलावा ब्रिटेन में स्थित प्री-कोंसिल में जाना पड़ता था | क...

इस्ट इंडिया कम्पनी के अधीन भारत का शासन

  1773 रेग्युलेटिंग एक्ट से लेकर 1853 का चार्टर एक्ट तक ब्रिट्स संसद ने जो नियम जो नियम पारित किए वह भारत के जनता  पर शासन के लिए नहीं था | बल्कि कम्पनी पर नियंत्रण अवम निरंक्षण के लिए था | कंपनी अपने अनुसार जनता पर शासन कराती थी  | इसी प्रकार ब्रिटिस सरकार 1858 के पहले भारत की जनता पर अप्रतक्ष शासनम था  1773 का रेग्युलेटिंग एक्ट :-   यह कम्पनी पर नियंत्रण कारने  का ब्रिट्स संसद का  अधिनियम पहला अधिनियम  था | इसके द्वारा भारत में सुनिश्चित नियम की नीव पडी बंगाल के लिए गवर्नर जनरेल की नियुक्ति किया  गया जिसका नाम वारेन हेस्टिंग था इसकी सहायता के लिए तिन कार्य करणी का गठन किया गया | सारे निर्णय बहुमत से लिए जाते थे | मद्रास अवम बम्बई के प्रेसीडेंसी को बंगाल के अधीन कर दिया गया गवरनर एक एक गवर्नर की सहायता से वहा पर शासन करता था इस एक्ट के द्वारा इंग्लैंड में बोर्ड ऑफ़ डायरेक्टर का गठन किया गया जो कंपनी का देख रेख करता था | इस अधिनियम के तहत 1774 में एक सुप्रिम कोर्ट की स्थापना किया गया यह भारत का अंतिम अपीली न्यायलय नहीं था कलकत्ता इ कुल ...