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भारतीय संविधान की अनुसूची

·           प्रथम अनुसूची :- इसमे संघ के घटक राज्यो ( 29 राज्य) एवं संघ शासित क्षेत्रो का उल्लेख है | ·          द्वतीय अनुसूची :- इसमे भारतीय राज्य - व्यवस्था के विभिन्न पदाधिकारियों को वेतन , भत्ते और पेंशन आदि का उल्लेख है | ·          तृतीय अनुसूची :- इसमे विभिन्न पदाधिकारियों का पद-ग्रहण के समय ली जाने वाली सपथ का उल्लेख है | ·           चौथी अनुसूची   :- इसमे राज्यों तथा संघीय क्षेत्रो की राज्यसभा में प्रतिनिधित्व का विवरण दिया गया है | ·           पाँचवी अनुसूची :- इसमे विभिन्न अनूसूचित क्षेत्रो और अनुसूचित जनजाति के प्रशासन और नियंत्रण के बारे में उल्लेख है | ·          छठी अनुसूची   :- इसमे असम , मेघालय , त्रिपुरा और मिजोरम राज्यों के जनजाति के प्रशासन के बारे में प्रावधान है  | ·  ...

संविधान सभा श्रोत का विवरण

संविधान निर्मात्री सभा के लोग भारतीयों को संविधान उपहार के रूप में देना चाहते थे | जो उनके  आवश्यकता के परिस्थिति के अनुरूप हो , इसी लिए संविधान निर्माताओ ने विश्व का संविधानो का अध्यन करके यह देखा की ,किस देश का संविधान सुचारू रूप से चल   रहा है और हमारे आवश्यकताओ के अनुरूप है | और संविधान निर्माताओ ने उस भाग को अपने संविधान में समाहित कर लिया क्योकि विधि विधान पर किसी का आनुवंशिक अधिकार नहीं है |                              *विश्व के संविधान से लिए गए तत्व * ब्रिटेन के संविधान से :- संसदी शासन प्रणाली , संसद में विधि निर्माण की प्रक्रिया ,  राष्ट्रपति को वीटो का अधिकार , नागरिकता प्रावधान समिति का अधिकार | अमेरिका :- प्रस्तावना ( पहला शब्द हम लोग ), संघीय व्यवस्था , मौलिक अधिकार जनहित वाद याचिका , न्याय पालिका  का  स्वतंत्रता ,  उप  राष्ट्रपति का पद राष्ट्रपति का निर्वाचन , राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया |  कनाडा :-    राज्य पाल का  पद , उच्...

* संविधान सभा की प्रमुख समितियां एंवम उनके अध्यक्ष

संघ शक्ति समिति                                            - जवाहर लाल नेहरू  प्रारूप समिति                                                   -  डॉ बी . आर . अम्बेडकर  कार्य संचालन समिति                                        - के . एम. मुंशी  झंडा समिति                                                      - जे.बी . क्रपलानी  वार्ता समिति ( प्रक्रिया समिति )                          - राजेंद्र प्रसाद  प्रांतीय समिति  ...

संविधान सभा का गठन(कैबिनेट मिशन )

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कैबिनेट मिशन के तहत कुल 389 सदस्य होने थे , जिसमे से 292 सदस्य भारतीय प्रान्त के थे | 4 सदस्य कमिशनरी के थे , 93 सदस्य देशी रियासत के थे | भारतीय संविधान के सदस्यों का चुनाव प्रान्तों के विधान सभा के सदस्यों द्वरा हुआ  अर्थात जनता के द्वारा हुआ 10 लाख के जनता पर चुनाव होन था ,और यह चुनाव अनापतिक प्रतिनिधित्व के  आधार  पर एकल संस्करणी  मत के द्वरा हुआ |भारत में संविधान सभा का गठन का अधार कबिनेट मिशन था | कैबिनेट मिशन के तहत संविधान सभा जुलाई ,1946 ई. में हुआ  लेकीन कैबिनेट मिशन द्वारा प्रस्तावित 389 सदस्य में से केवल 296 सदस्यो का चुनाव हुआ | जिसमे 208 कांग्रेस के थे ,73 मुस्लिम लीग , 15 निर्दली पार्टी के सदस्य थे | याद रहे इसमे 'शाम वादी पार्टी' के कोई भी सदस्य  भाग नहीं  लिया  मुस्लिम लीग पार्टी प्रारम्भ में भाग लेने का निर्णय लिया था , जब पहली संविधान सभा की बैठक हुई ,तो मुसलिम लीग सामिल नहीं हुई |  संविधान सभा की पहली बैठक 9 सितम्बर, 1946 ई. को दिल्ली के सेन्ट्रल हाल में हुई | इस दिन डॉ सचिद्दा नन्द सिन्हा को अस्थाई या प्रोटेम स्पीक...

*अंतरिम सरकार *

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1. जवाहर लाल नेहरू                   - कार्य परिषद के उपाध्यक्ष  ब्रिटिस माहाले को देखते थे  2. सरदार बल्लभ भाई पटेल         - गृह मंत्रालय  3. बलदेव सिंह                             - रक्षा मंत्री  4. सी . राज. गोपाला चारी            - शिक्षा मंत्री  5. जान माथाई                            - उद्द्योग एवं शिक्षा मंत्री  6. डॉ. C.H. भाभा                        - कार्य खनन एवं शक्ति  7. डॉ. राजेंद्र प्रसाद                       -खाद्य एवम कृषि मंत्रालय  8. आसफ अली                            - रेल मंत्री  9. जगजीव...

1947 ई. का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

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ब्रिटिस संसद ने 4 जुलाई 1947ई. को 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम' प्रस्तावित किया  गया , जो 18 जुलाई , 1947ई. को स्वीकृत किया गया | इस अधिनियम में 20 धाराये थी | इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान निम्न है - दो अधिराज्यो की स्थापना - : 15 अगस्त ,1947ई.  को भारत एवं पाकिस्तान नामक दो अधिराज्य बना गए और उनकी सत्ता ब्रिटिस सौप देगी |  सत्ता के उत्तदायीत्व  दोनों अधिराज्यो के समिधान सभा को सौप दिया जायेगा | भारत एवं पाक में एक-एक गवनर जनरल होंगे ,जिनकी नियुक्ति उनके मंत्री मंडल के सलाह से किया जायेगा | जब तक संविधान सभा  संविधान का  निर्माण नहीं कर लेती , तब तक वे विधान मंडल के रूप में कार्य करेंगे  भारत के मंत्री पद को समाप्त कर दिये जायेंगे | 1935 के भारतीय शासन अधिनियम द्वारा शासन जबतक संविधान सभा द्वारा नया संविधान  बनाकर तैयार नहीं किया जाता है ; तबतक उस समय 1935 के भारतीय शासन अधिनियम द्वारा शासन होगा |  इस अधिनियम के अधीन भारत भारत डोमेनियन को सिंध , बलूचिस्तान , प० बंगाल ,पूर्वी बंगाल , पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत और असम के सीलहट जिले को छोड़ कर ...

1935 का भारत शासन अधिनियम

  यह अधिनियम अभी तक पारित सभी अधिनियम में से सबसे बड़ा अधिनियम है | इसमें  321 अनुच्छेद  ,  10 अनुसूची  थी  वर्तमान में  75% संविधानिक  ढांचा इसी एक्ट पर आधारित है | इस एक्ट के पारित से भारत का शासन एकात्मक था  इसके द्वारा भारत में पहली बार संघात्म सरकार  की स्थापना हुई | भारतीय संघ का निर्माण ब्रिटीस  भारतीय प्रान्तों और देशी रियासतो से मिल कर होना था | प्रान्तों का विलय अनिवार्य था लेकिन देशी रियासतों का विलय एच्छिक था जो देशी रियासते भारतीय संघ में विलय होना चाहती थी उन्हें "  स्टूमेंट ऑफ़ एक्सेस  " पर हस्ताक्षर करना था ,लेकिन कुछ देशी रियासते के शासको इंकार कर देने से भारतीय संघ अस्तित्व में नहीं आ सका सैन्धान्तिक रूप से तो संघात्मक सरकार का प्रावधान हुआ , लेकिन व्यावहारिक रूप से यह अस्तित्व में नहीं आ सका | इसी लिए इसकी आलोचना करते हुए इसे "  निरंकुशता का एक्ट  " भी कहते  है  इसके द्वारा भारत में संघीय"  न्यायालय या फेडरल कोर्ट  " की स्थापना हुई लेकिन यह अंतिम अपीली न्यायालय नहीं था , क्यो...