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भक्ति काल

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  भक्तिकाल ( 13 18 ई० से 1643 ई० ) भक्ति काल के अन्य नाम :- 1) श्वर्ण युग काल 2) पूर्व मध्य काल   भक्ति काल के चार भेद है | i) ज्ञान मार्ग   (संत कवि ) ii) प्रेम मार्गी   (सूफी कवि ) iii ) राम भक्ति iv) कृष्ण भक्ति   i ) ज्ञान मार्ग   (संत कवि )             कवि               रचाना कवीर दास - विजक मलूक दास - ज्ञान परोस पक्ष गुरु नानक - जप जी सुन्दर दास - ज्ञान समुन्द्र   ii) प्रेम मार्ग (सूफी संत )     कवि रचना जायसी -पद्मावत , अखरावट मंझन।         - मधु मालती कुतुबन -मृगावती सेख नवी -ज्ञान दीप नूर मुहम्मद -अनुराग , वासुरी , इन्द्रावती   iii) राम भक्ति कवि ...

हिंदी साहित्य का इतिहास

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  हिंदी पद्य साहित्य को चार भागो में बाटा गया है | 1. आदिकाल 2. भक्ति काल 3. रीति काल 4. आधुनिक काल   * आदिकाल का समय :-   आदि काल का समय 943 ई . से 1343 ई . तक (संवत् 1050 से 1375 )तक चला *आदि काल के अन्य नाम - i )    आदिकाल                                 - हजारी प्रसाद द्विवेदी ii )   वीर गाथा काल                             - रामचन्द्र शुक्ल iii ) शिद्ध सामर्थ काल                           -   डॉ राहुल साकृत्यान iv ) शिद्ध सामर्थ काल या चारण काल -   डॉ राम कुमार वर्मा   रासो साहित्य   चन्द्रवर दाई                   पृथ्वी राज रासो नरपति नाल्ह   ...

*मध्य पाषाण काल *

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  भारतीय प्रागैतिहासिक से पहले दो कालो की जानकारी थी पूरा पाषाण काल व नव पाषाण काल और वहा से कुछ छोटे-छोटे उपकरण प्राप्त हुआ | जिन्हें शुक्ष्म औजार  कहा गया ,   क्योकि  इनकी  लम्बाई 1-8 सेमी के बिच थी | ये औजार त्रिभाजा , आयता , समलम्ब चतुर्भुज आकार के औजार की प्रमुखता थी | और इस काल में हड्डी के बने औजार भरी मात्रा में प्राप्त होने लगे | मानव खाद्य संग्राहक एवम आखेटक अवस्था से होता हुआ पशु पालन की अवस्था मिहो गया जो   निम्न्लोखित विशेषता है - ·          मह्दहा (प्रताप गढ़ ):- प्रताप गढ़ में स्थित महदहा से हमें हड्डियों के बने आभूषण , मृग श्रिंग के छल्लो की माला एवंम स्तम्भ गर्त    के प्रमाण मिलते है | ·          चौपानी मांडव (ईलाहाबाद ):- ईलाहाबाद के पास बेलम घाटी में स्थित एक महत्वपूर्ण स्थल जहा से जंगली चावल के प्रमाण मिले है यहाँ पर प्रागैतिहासिक काल के तीनो कालो के प्रमाण मीलते है | ·        ...