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संविधान सभा का गठन(कैबिनेट मिशन )

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कैबिनेट मिशन के तहत कुल 389 सदस्य होने थे , जिसमे से 292 सदस्य भारतीय प्रान्त के थे | 4 सदस्य कमिशनरी के थे , 93 सदस्य देशी रियासत के थे | भारतीय संविधान के सदस्यों का चुनाव प्रान्तों के विधान सभा के सदस्यों द्वरा हुआ  अर्थात जनता के द्वारा हुआ 10 लाख के जनता पर चुनाव होन था ,और यह चुनाव अनापतिक प्रतिनिधित्व के  आधार  पर एकल संस्करणी  मत के द्वरा हुआ |भारत में संविधान सभा का गठन का अधार कबिनेट मिशन था | कैबिनेट मिशन के तहत संविधान सभा जुलाई ,1946 ई. में हुआ  लेकीन कैबिनेट मिशन द्वारा प्रस्तावित 389 सदस्य में से केवल 296 सदस्यो का चुनाव हुआ | जिसमे 208 कांग्रेस के थे ,73 मुस्लिम लीग , 15 निर्दली पार्टी के सदस्य थे | याद रहे इसमे 'शाम वादी पार्टी' के कोई भी सदस्य  भाग नहीं  लिया  मुस्लिम लीग पार्टी प्रारम्भ में भाग लेने का निर्णय लिया था , जब पहली संविधान सभा की बैठक हुई ,तो मुसलिम लीग सामिल नहीं हुई |  संविधान सभा की पहली बैठक 9 सितम्बर, 1946 ई. को दिल्ली के सेन्ट्रल हाल में हुई | इस दिन डॉ सचिद्दा नन्द सिन्हा को अस्थाई या प्रोटेम स्पीक...

*अंतरिम सरकार *

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1. जवाहर लाल नेहरू                   - कार्य परिषद के उपाध्यक्ष  ब्रिटिस माहाले को देखते थे  2. सरदार बल्लभ भाई पटेल         - गृह मंत्रालय  3. बलदेव सिंह                             - रक्षा मंत्री  4. सी . राज. गोपाला चारी            - शिक्षा मंत्री  5. जान माथाई                            - उद्द्योग एवं शिक्षा मंत्री  6. डॉ. C.H. भाभा                        - कार्य खनन एवं शक्ति  7. डॉ. राजेंद्र प्रसाद                       -खाद्य एवम कृषि मंत्रालय  8. आसफ अली                            - रेल मंत्री  9. जगजीव...

1947 ई. का भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम

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ब्रिटिस संसद ने 4 जुलाई 1947ई. को 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम' प्रस्तावित किया  गया , जो 18 जुलाई , 1947ई. को स्वीकृत किया गया | इस अधिनियम में 20 धाराये थी | इस अधिनियम के प्रमुख प्रावधान निम्न है - दो अधिराज्यो की स्थापना - : 15 अगस्त ,1947ई.  को भारत एवं पाकिस्तान नामक दो अधिराज्य बना गए और उनकी सत्ता ब्रिटिस सौप देगी |  सत्ता के उत्तदायीत्व  दोनों अधिराज्यो के समिधान सभा को सौप दिया जायेगा | भारत एवं पाक में एक-एक गवनर जनरल होंगे ,जिनकी नियुक्ति उनके मंत्री मंडल के सलाह से किया जायेगा | जब तक संविधान सभा  संविधान का  निर्माण नहीं कर लेती , तब तक वे विधान मंडल के रूप में कार्य करेंगे  भारत के मंत्री पद को समाप्त कर दिये जायेंगे | 1935 के भारतीय शासन अधिनियम द्वारा शासन जबतक संविधान सभा द्वारा नया संविधान  बनाकर तैयार नहीं किया जाता है ; तबतक उस समय 1935 के भारतीय शासन अधिनियम द्वारा शासन होगा |  इस अधिनियम के अधीन भारत भारत डोमेनियन को सिंध , बलूचिस्तान , प० बंगाल ,पूर्वी बंगाल , पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत और असम के सीलहट जिले को छोड़ कर ...

1935 का भारत शासन अधिनियम

  यह अधिनियम अभी तक पारित सभी अधिनियम में से सबसे बड़ा अधिनियम है | इसमें  321 अनुच्छेद  ,  10 अनुसूची  थी  वर्तमान में  75% संविधानिक  ढांचा इसी एक्ट पर आधारित है | इस एक्ट के पारित से भारत का शासन एकात्मक था  इसके द्वारा भारत में पहली बार संघात्म सरकार  की स्थापना हुई | भारतीय संघ का निर्माण ब्रिटीस  भारतीय प्रान्तों और देशी रियासतो से मिल कर होना था | प्रान्तों का विलय अनिवार्य था लेकिन देशी रियासतों का विलय एच्छिक था जो देशी रियासते भारतीय संघ में विलय होना चाहती थी उन्हें "  स्टूमेंट ऑफ़ एक्सेस  " पर हस्ताक्षर करना था ,लेकिन कुछ देशी रियासते के शासको इंकार कर देने से भारतीय संघ अस्तित्व में नहीं आ सका सैन्धान्तिक रूप से तो संघात्मक सरकार का प्रावधान हुआ , लेकिन व्यावहारिक रूप से यह अस्तित्व में नहीं आ सका | इसी लिए इसकी आलोचना करते हुए इसे "  निरंकुशता का एक्ट  " भी कहते  है  इसके द्वारा भारत में संघीय"  न्यायालय या फेडरल कोर्ट  " की स्थापना हुई लेकिन यह अंतिम अपीली न्यायालय नहीं था , क्यो...

1919 ई. का भारत शासन अधिनियम

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  भारतीयों को स्वशासन देने की दिशा  में या स्थाई संस्थाओं का विकास क्रमित या भारत उत्तेर्दायी सरकार की स्थापना करने या संसदी प्रणाली की करने के लिए ब्रिटिस ने यह अधिनियम  पारित किया क्योकि यह मांटेग्यू चेम्सफोर्ड के प्रयास से यह पारित हुआ , इसी लिए इसे मांटेग्यू चेम्सफोर्ड सुधार के नाम से जाना जाता है ,20 अगस्त 1917 ई . को इसके प्रस्तावना की घोषणा हुई इस एक्ट को अगस्त प्रस्तावना या अगस्त घोषणा पत्र के नाम से जाना जाता है | इसकी रिपोर्ट जुलाई 1918 ई . में प्रकाशित हुई यह एक्ट 1900 ई . में बना लेकिन यह क्रिया नविन 1921 ई . में किया गया इसकी निम्नलिखित विशेषता है - 1. केन्द्रीय विधान मंडल को द्विसदनात्मक बना        दीया गया-   ( a ) उच्च सदन को - राज्य परिषद् (कार्य काल   5 वर्ष , कुल सदस्य 60 ) ( b ) निम्न सदन - विधान सभा (कार्य काल 3 वर्ष , कुल सदस्य 146 ) 2 . प्रम्तिय विधान मंडल में कुछ सदस्य जनता के द्वारा चुन कर आने लगे , इस प्रकार प्रतक्ष्य निर्वाचन की नीव पड़ी | 3. इस अधिनियम ने भारत में ...

1909ई. का भारत शासन अधिनियम

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   इसे मार्ले   मीन्टो सुधार के नाम से जाना जाता है | 1. इस एक्ट का सबसे दुर्भाग्य पूर्ण पहलू यह था , की पहली बार मुसलमानों को धर्म के अधार   पर अलग प्रतिनिधित्व दिया गया | अर्थात सम्प्रदायीत्व   की सुरात हुआ इसका परिणाम भारत बिभाजन के रूप में देखने को मिला | 2. इस एक्ट की मुख्या विशेषता यह थी   की ,   वायसराय की कार्य करणी में गैर सरकारी सदस्यों की संख्या बढ़ा दिया गया तथा पहली बार वायसराय की कार्य करणी में भारतीय व्यक्ति की नियुक्ति हुई जिसका नाम एच. पी. सिन्हा था | 3. इस एक्ट के द्वारा वार्षिक बजट पर पूरा बहस करने के साथ - साथ पूरा प्रश्न पूछने का अधिकार मिला , परन्तु मतदान का अधिकार नहीं मिला | 4. इसी एक्ट में अप्रतक्ष्य शासन का नीव पड़ी |  

1892ई. भारत शासन अधिनियम

1885 में स्थापित राष्ट्रिय कांग्रेस तथा भारत के जनता का आन्दोलन के दबाव में आकर 1861 ई.  के सुधार करते हुए | इस एक्ट को पारित किया गया था | जी. एन. सिंह के अनुसार यह एक्ट कांग्रेस का पहला प्रयत्न था  इस एक्ट की निम्नलिखित बिशेषता है - 1. वायसरा की कार्य करणी में गैर सरकारी सदस्यों की बृद्धि किया गया | 2. वार्षिक बजट पर भारतीयों को बहस करने का अधिकार मिल गया , लेकिन उन्हें पूरा प्रश्न      पुछने का अधिकार नहीं मिला | 3. प्रान्तों के विधान मंडलों में कुछ सदस्य विश्वविद्यालयों द्वारा, कुछ जिला बोर्डो   , कुछ          व्यापर मंडलों द्वारा , एवंम नगरपालिका द्वारा मनोनीत हो कर आने लगे इस प्रकार            भारत में  अप्रतक्ष्य निर्वाचन की नीव पड़ी |